Friday 19 February 2010

अच्छा लगे बड़ा ही ,कुदरत का ये वर्ताव

अच्छा लगे बड़ा ही , कुदरत का ये  वर्ताव.

चढ़ने को है सूरज ,बढ चली है नाव.

वृक्षों की पत्तियों पर ,ओस का ये छिडकाव.

अकड़ी सी टहनियों में , यूँ बला का घुमाव.

नटखट सी नदी का , अलबेला सा ठहराव.

महकी सी हवा का , शर्मीला सा बहाव .

चहकते से पंछियों का ,तट पर ये जमाव .

गुनगुनाते से दिल में ,उमड़ते ये भाव .

अच्छा लगे बड़ा ही ,कुदरत का ये वर्ताव .